• February 24, 2024
 राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय का लोकार्पण किया

-राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय का लोकार्पण किया। इससे पहले उन्‍होंने आयुष विश्‍वविद्यालय का शिलान्‍यास किया।

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गोरखपुर। 

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय का लोकार्पण किया। इससे पहले उन्‍होंने आयुष विश्‍वविद्यालय का शिलान्‍यास किया। उत्तर प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय के शिलान्यास समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वैदिककाल से प्रतिष्ठित आयुष प्रविधियों की महत्ता को आधुनिक काल में स्थापित करते हुए कहा कि कोरोना की दूसरी लहर को नियंत्रित करने में आयुष ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह विश्वविद्यालय आयुर्वेद, योग, यूनानी, होम्योपैथी व सिद्ध के अलग-अलग महाविद्यालयों के सत्र, पाठ्यक्रम, परीक्षा और परिणाम के नियमन तथा इन चिकित्सा पद्धतियों का लाभ आमजन तक और सुलभ कराने का काम करेगा। प्राचीन एवं परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर स्थापित होने वाला यह विश्वविद्यालय परम्परागत चिकित्सा पद्धति के विकास में मील का पत्थर स्थापित करेगा। पूर्वांचल के लिए गौरव की बात यह होगी कि इस आयुष विश्वविद्यालय का नाम योग की तमाम विधाओं के प्रणेता महायोगी गोरखनाथ के नाम पर होगा।

राष्ट्रपति ने वैदिक मंत्रोचार के बीच भूमि पूजन कर रखी विश्‍वविद्यालय की आधारशिला
भटहट के पिपरी में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के शिलान्यास स्थल पर पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सबसे पहले वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन कर आधारशिला रखी और इसके बाद मुख मंच से शिलान्यास पट्टिका का बटन दबाकर अनावरण किया। भूमि पूजन कार्यक्रम में उनकी पत्नी व देश की प्रथम महिला सविता कोविंद, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। शिलान्यास समारोह में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने वैदिक काल से ही आरोग्य को सर्वाधिक महत्व दिया है। उनका मानना था कि किसी भी लक्ष्य को साधने के लिए शरीर पहला साधन होता है। योग के माध्यम से सामाजिक जागरण का अलख जगाने वाले महायोगी गोरखनाथ ने कहा है, ‘यदे सुखम तद: स्वर्गम, यदे दुखम तद नर्कम’। उन्होंने कहा कि शरीर को स्वस्थ रखने की जो पद्धतियां प्राचीन काल से प्रचलित रही हैं, उन्हें ही सामूहिक रूप में आयुष कहा गया। उन्होंने यह कहते हुए प्रसन्नता जताई कि महायोगी गोरखनाथ के नाम पर आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना हो रही है और जल्द ही इससे संबद्ध होकर उत्तर प्रदेश में आयुष के सभी संस्थान और बेहतर कार्य कर सकेंगे। राष्ट्रपति कोविंद ने जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में योग की उपयोगिता से हम सभी परिचित हैं। भारत का योग यहां की संस्कृति जितना ही प्राचीन है।

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