• June 16, 2024
 नदियों का जलस्तर तो हुआ कम, दुश्वारियां बरकरार

-नदियों का जलस्तर कम होने के बाद भी ग्रामिणों की समस्याएं

बरकार

 

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गोरखपुर। जिले में नदियों का जलस्तर भले ही कम हो रहा है, लेकिन बाढ़ की त्रासदी सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि मवेशियों पर भी कहर बनकर टूट रही है। घरों में रखे राशन के साथ मवेशियों के लिए रखे भूसे खराब हो गए है। लोगों के ऊपर जानवरों को खिलाने के लाले पड़े हुए हैं। कई लोग मवेशियों को औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं।

पिछले सप्ताह रोहिन, राप्ती, घघरा, आमी और गोर्रा नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया था। इसके चलते गोरखपुर शहर की शिवपुर कॉलोनी, मोहरीपुर, ग्रीन सिटी, राजेंद्र नगर के अलावा शहर के नजदीक बसे डोमिनगढ़, उत्तरी कोलिया व दक्षिणी कोलिया, नया गांव, बहरामपुर, चपरा पूर्वी, कठउर समेत अनेक गांव बाढ़ की दुश्वारियां अभी भी झेल रहें है।

बाढ़ से जनपद को 391 गांव प्रभावित

शहर से लेकर गांव तक मची बाढ़ की तबाही से अब तक 391 से ज्यादा गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। इन गांवों के करीब 3 लाख 12 हजार से अधिक लोगों के सामने तो भोजन- पानी का संकट बना है ही, मगर इनके मवेशी भी अब भूख से तड़प रहे हैं। जनपद में 56 हजार से अधिक हेक्टेयर की भूमि बाढ़ से प्रभावित है।

बाढ़ से जानवरों को हरा चारा तो दूर, भूसा तक नसीब नहीं हो रहा है। हालत ये है कि इंसानों के साथ ही जानवरों को भी अब खाने के लाले पड़ रहे हैं।

किसी-किसी मोहल्ले में सात से आठ फुट तक पानी भरा हुआ था। अब सभी नदियों का जलस्तर कम होने से इन मोहल्लों व ग्रामीण इलाकों में भरा पानी उतरने लगा है, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां जस की तस हैं। हर्बर्ट बांध के किनारे रह रहे बहरामपुर गांव के लोग हों या रिंग बांध पर रह रहे कोलिया उत्तरी व दक्षिणी के लोग, हर जगह भोजन-पानी का संकट बना हुआ है।

पानी में डूब गया जानवरों का चारा

शहर के मलौनी बांध पर स्थित बड़गों गांव से सटे दर्जनों गांव के लोगों ने यहां बंधे पर परिवार और मवेशियों संग शरण ले रखी है। यहां बांध पर प्लास्टिक डालकर अपना आशियाना बनाए बैठे रामेश्वर कश्यप ने बताया कि घर पूरी तरह पानी में डूब चुका है। वे 10 दिनों से पूरे परिवार और जानवरों के साथ बांध पर रह रहे हैं। परिवार के लिए तो किसी तरह दो वक्त की रोटी का इंतजाम हो जाता है, लेकिन मवेशी भूखे पड़े हैं। आसपास का पूरा इलाका जलमग्न है। जानवरों को चरने के लिए छोड़ा नहीं जा सकता। जानवरों के लिए रखा भूसा पानी में डूब चुका है।

पलायन के वक्त घर से लेकर चले थे भूसा

वहीं, ग्रामीण रामचंद्र यादव का कहना है कि पलायन के वक्त वे घर से भूसा लेकर चले थे। कुछ दिनों तक काम चल गया, इसके बाद गांव के लोगों से भूसा उधार लेकर मवेशियों को खिलाया। मगर यही संकट सबके सामने है। ऐसे में अब कोई उधार भी भूसा देने को तैयार नहीं है। मंझरियां बिस्टौल के परसन बताते हैं कि हर साल बाढ़ में प्रशासन की ओर से राहत सामग्री के साथ जानवरों के लिए चारा भी वितरण किया जाता था, लेकिन इस बार इतनी भयंकर बाढ़ होने के बाद भी कोई इंतजाम नहीं किया गया। गांव के पतरू की एक गाय और एक बछड़ा भूख से दम तोड़ चुका है।

मोबाइल नहीं हो पा रहा चार्ज

बाढ़ प्रभावित इलाकों में एक सप्ताह से बिजली आपूर्ति ठप है। ऐसे में जो लोग अपने घर पहुंचे हैं वे बिना बिजली के वक्त गुजार रहे हैं। लोगों का मोबाइल भी चार्ज नहीं हो पा रहा है। इस वजह से परिजनों को आपसी संवाद में दिक्कत आ रही है। अभी यह स्थिति सुधरने में कम से कम एक सप्ताह का वक्त लगेगा। क्योंकि अधिकांश जगह ट्रांसफार्मर के पास तक पानी भरा है। लिहाजा अभी बिजली आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद नहीं है।

नाव से करते हैं निगरानी

मवेशियों के साथ बांध पर रह रहे लोग दिन में कई बार नाव से अपने घर तक जाते हैं। ये लोग वहां रखे सामान तथा छतों पर रह रहीं बहू-बेटियों की जरूरत, दवा आदि की जानकारी लेते हैं। जरूरत पड़ी तो नाव पर बैठाकर बाहर भी लाते और ले जाते हैं। कुछ घरों के लोगों ने अगर किसी ऊंची जगह पर भूसा रखा है तो वे वहां जाकर भूसा भी लाते हैं।

1998 में टूटे थे 13 बांध, डूब गया था आधा शहर

साल 1998 में 23 अगस्त को महज 24 घंटे में गोरखपुर में 64 में से 13 बांधों के टूट जाने से गोरखपुर टापू बन गया था। इस साल भी एक हफ्ते के भीतर लगातार कई बांध टूट रहे हैं। तब गोरखपुर का राजधानियों से सड़क और रेलमार्ग से संपर्क 72 घंटे से ज्यादा समय के लिए टूट गया था। अगस्त 2017 में भी गोरखपुर रोहणी नदी पर बना बांध 5 जगहों पर टूट गया था।

 

दिक्कत हो या कोई सूचना देनी हो तो यहां मिलाएं फोन-

बाढ़- 0551-2201796, 9450119142

स्वास्थ्य- 0551-2202205, 9450119127

पशुपालन- 0551-2204196

नगर निगम- 0551-2204196, 9450119104

बिजली निगम- 0551-2985901, 9450119071

जिलापूर्ति- 0551-2980096, 9450119074

पंचायतीराज- 0551-2985854, 9532824859

जलनिगम- 0551-2985913, 8765134842

पीडब्लूडी- 0551-2980093, 9532797104

 

बाढ़ से प्रभावित गांव : 391

बाढ़ से प्रभावित जनसंख्या : 312605

बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रफल : 56240 हेक्टेयर

बाढ़ से प्रभावित मवेशी : करीब 2 लाख

चिन्हित पशु शिविर : 113

संचालित पशु शिविर :113

उपचार पशुओं की संख्या : 16387

पशु टीकाकरण : 29848

पशुओं के लिए वितरित भूसा : 801 .20 कुंतल

आरक्षित भूसा : 1200 कुंतल

 

क्या बोले माननीय?

सांसद रविकिशन ने कहा कि हमारी टीम क्षेत्र में लगातार बाढ़ पीड़ितों की मदद में लगी है। अगर किसी क्षेत्र में राशन- अनाज नहीं पहुंचा है तो इसके लिए कोई भी व्यक्ति किसी भी समय हमारे कार्यालय पर सिर्फ एक फोन करके संपर्क कर सकता है। महज कुछ घंटों के भीतर अनाज से लेकर उसे अन्य सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी। कल मैं स्वंय गोरखपुर आ रहा हूं। पब्लिक को किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। सांसद ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। यह नंबर है- 9415800601 (सांसद प्रतिनिधि), 9506060006 (पीआरओ, सांसद), 9415258620 (क्षेत्रीय मंत्री, भाजपा)।

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