• February 22, 2024
 फसलों में लगे फाल आर्मी वार्म कीट तो विशेषज्ञ से करें संपर्क

गोरखपुर। वर्तमान सीजन में फसलों में फाल आर्मी वार्म कीट का प्रकोप बढ़ रहा है। किसानों को इस कीट से अपनी फसल को बचाने के लिए सजग रहने की आवश्यकता है। समय रहते यदि उपाय कर लिए जाएं तो फसलों को बचाया जा सकता है। ये मक्का, ज्वार, बाजरा तथा गन्ने के फसल में फाल आर्मी वार्म कीट ज्यादातर लगते हैं। इस कीट का लार्वा ही सबसे अधिक हानिकारक होता है। शरीर की अन्तिम खंड पर वर्गाकार चार बिन्दु दिखाई देती है। यह मक्का आदि फसलों की गोभ के अन्दर घुसकर पौधे को हानि पहुंचाता है। ये जानकारी जिला कृषि रक्षा अधिकारी संजय सिंह ने दी।

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समस्या होने पर करें संपर्क

जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने फाल आर्मी बार्म कीट की नियंत्रण व प्रबंधन हेतु कई सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि फसल की सतत निगरानी तथा सर्वेक्षण करते रहें। कीट के प्रकोप की दशा में जनपद व विकास खण्ड के अधिकारी व कर्मचारी को तत्काल सूचित करें। कीट के प्रकोप की स्थिति में सहभागी फसल निगरानी एवं निदान प्रणाली के वाट्सऐप नम्बर 9452247111 तथा 9452257111 पर प्रभावी फसल का फोटो भेजकर 48 घंटे के अन्दर समाधान प्राप्त करे।

 

इन दवाओं का करें प्रयोग

जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि ट्राइकोग्रामा प्रेटिओसम या टेलीनोमस रेमस दवा को 50 हजार अंडे प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए। शाम सात से रात्रि नौ बजे तक 3-4 प्रकाश प्रपंच एवं 6-8 बर्ड पर्चर प्रति एकड़ लगाने की आवश्यकता है। वहीं, 35-40 फेरोमोन ट्रेप प्रति हेक्टेयर की दर से लगाने पर कीट से प्रभावी रोकथाम संभव है। इसके अवाला क्लोरेंट्रानिलीप्राल 18.5 फीसद, एससी 0.4 मिली प्रति लीटर पानी या इमामेक्टिन बेनजोइट 0.04 ग्राम प्रति लीटर पानी अथवा थायामेथाक्सॉम 12.6 फीसद एवं लैंब्डासाइहैलोथ्रिन 9.5 फीसद, 0.5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।

इस तरह करें पहचान

फाल आर्मी वार्म कीट की मादा प्रजाति कभी-कभी पत्तियों की ऊपरी सतह और तनों के अलावा ज्यादातर पत्तियों की निचली सतह पर एक से अधिक पर्त में हल्के पीले या भूरे रंग के अंडे देकर सफेद झाग से ढक देती है। इसका लार्वा भूरा या धूसर रंग का और पिछले हिस्से में तीन पतली सफेद धारियों व सिर पर उल्टा अंग्रेजी का ””वाई”” अक्षर दिखता है। उसके शरीर के दूसरे अंतिम खंड पर वर्गाकार चार गहरे बिंदु और अन्य खंडों पर छोटे छोटे बिंदु समान लंबाई में होते हैं। इस बहुभोजी व 80 फसलों पर अपना जीवन चक्र पूर्ण करने की क्षमता रखने वाले कीट का लार्वा ही सर्वाधिक हानिकारक है। फसल पर इस कीट द्वारा उत्सर्जित पदार्थ महीन भूसे के बुरादे जैसा दिखाई देता है।

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