• May 19, 2024
 पूर्व डीजीपी बृजलाल बोले ‘सपा का चुनाव चिन्ह एलएमजी होना चाहिए, मुख्तार अंसारी की संरक्षक है पार्टी

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उत्तर प्रदेश ,समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ‘बुलडोजर’ वाले बयान पर भारतीय जनता पार्टी कड़ी प्रतिक्रिया जता रही है। अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा था कि भाजपा को अपना चुनाव चिन्ह बुलडोजर रख लेना चाहिए। क्योंकि इस सरकार की बड़ी उपलब्धि बुलडोजर रही है। इस पर यूपी बीजेपी के तमाम बड़े नेता सपा पर हमलावर हैं। उनका कहना है कि माफिया और भ्रष्टाचारियों पर बुलडोजर चलता रहेगा। समाजवादी पार्टी उनको संरक्षण देती रही है। लेकिन यह सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में कानून का शासन है। जहां कहीं भी जरूरत होगी, बुलडोजर चलाया जाएगा।

सपा का चुनाव चिन्ह एलएमजी होना चाहिए

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी और भाजपा से राज्यसभा सांसद बृजलाल ने अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने पार्टी पर बाहुबलियों और माफिया को संरक्षण देने, जबकि कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। सपा अध्यक्ष के बयान का जवाब देते हुए पूर्व डीजीपी ने कहा, अखिलेश यादव ने कहा है कि बीजेपी का चुनाव चिन्ह बुलडोजर है। बुलडोजर माफियाओं पर चलता है, अपराधियों पर चलता है। जिन्होंने अपराध से अकूत संपत्ति खड़ी की है और योगी राज में बुलडोजर चलता रहेगा। अखिलेश यादव और सपा का चुनाव चिन्ह लाइट मशीन गन (एलएमजी) होना चाहिए। एलएमजी का सीधा संबंध समाजवादी पार्टी से है।

यूपी एसटीएफ पर दबाव बनाया गया

उन्होंने आगे कहा, जनवरी, 2004 में मुख्तार अंसारी ने कृष्णानंद राय को मारने के लिए बाबूलाल यादव फौजी से लाइट मशीन गन मंगाई थी। वह मुख्तार के गनर मुन्ना यादव का भांजा है। उस वक्त शैलेंद्र सिंह डिप्टी एसपी थी। उन्होंने एलएमजी और करीब 250 कारतूस बरामद किए थे। आरोपियों के खिलाफ पोटा के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। जैसे ही मुकदमा कायम हुआ, यूपी एसटीएफ पर आफत आ गई। एसएसपी एसटीएफ बदल दिए गए। वाराणसी के डिप्टी एसपी एसटीएफ शैलेंद्र सिंह को इतना प्रताड़ित किया गया कि फरवरी 2004 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। पोटा के मुकदमे की जांच हुई। ऐसे मामलों में राज्य सरकार चार्जसीट लगाने की अनुमति देती है।

सपा सरकार ने बचा लिया

उन्होंने आगे कहा, पहले मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे। उन्होंने मुन्ना यादव और बाबूलाल यादव के खिलाफ पोटा के तहत कार्रवाई की स्वीकृति दी। मगर मुख्तार अंसारी के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति नहीं दी। मुन्ना और बाबूलाल यादव को 10 साल की सजा हो गई। मगर सपा सरकार ने मुख्तार अंसारी को बचा लिया। उसके बाद मुख्तार अंसारी का मनोबल इतना बढ़ा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में उसने कृष्णानंद राय को मारने का फाइनल प्लान बनाया। अक्टूबर, 2005 में सरकार के सहयोग से अपना तबादला गाजीपुर से फतेहगढ़ जेल में करा लिया।

घर पर इकट्ठा हुए थे कुख्यात गैंगेस्टर

पूर्व डीजीपी ने कहा, बाद में हत्या से पहले मुख्तार अंसारी के घर अताउर रहमान, संजीव जीवा, शहाबुद्दीन और मुन्ना बजरंगी जैसे बड़े अपराधी इकट्ठा हुए। इसके बारे में सबको मालूम था। एसपी ने रेड नहीं किया। डीजीपी ऑफिस को भी मालूम था कि ये सभी मुख्तार अंसारी के घर जमा हुए थे। मगर फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।’ पूर्व डीजीपी और भाजपा नेता के इस बयान पर फिलहाल समाजवादी पार्टी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि यूपी में इसी साल के आखिर में विधानसभा चुनाव 2022 का बिगुल बजना है। ऐसे में अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहेगा। देखना है समाजवादी पार्टी पर लगे इतने गंभीर आरोपों का पदाधिकारी क्या जवाब देते हैं।

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