• May 19, 2024
 84 फीसदी दिमागी बुखार यानि इंसेफेलाइटिस के मरीज उथले हैंडपंप और जलस्रोतों का कर रहे हैं इस्तेमाल

सीआईएफ के आधार पर स्वास्थ्य विभाग के जरिये सामने आया निष्कर्ष

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उथले हैंडपंप, सुअरबाड़े और जानवर फैला रहे हैं इंसेफेलाइटिस

84 फीसदी मरीज उथले हैंडपंप व जलस्रोतों का इस्तेमाल करते पाए गये

खबरी इंडिया, गोरखपुर।
स्वास्थ्य विभाग प्रत्येक इंसेफेलाइटिस मरीज का केस इंवेस्टीगेशन फार्म (सीआईएफ) भरवाता है । इस फार्म के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि इंसेफेलाइटिस के सबसे बड़े कारक उथले हैंडपंप, सुअरबाड़े और चूहे और छछूंदर जैसे जानवर हैं । यह पाया गया है कि 84 फीसदी दिमागी बुखार यानि इंसेफेलाइटिस के मरीज उथले हैंडपंप और जलस्रोतों का इस्तेमाल कर रहे हैं । स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सकों और स्टॉफ नर्स के प्रशिक्षण कार्यक्रम में इस सर्वे के प्रति उनको संवेदीकृत किया है ।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुधाकर पांडेय का कहना है कि चूहा, मच्छर, छछूंदर और दूषित पानी का सेवन दिमागी बुखार के सबसे बड़े कारक रहे हैं । दिमागी बुखार के जो भी मरीज पाए जाते हैं उनका सीआईएफ करवाया जाता है । सीआईएफ के आधार पर राज्य स्तर पर जो निष्कर्ष सामने आए हैं उनके मुताबिक दिमागी बुखार के 55 फीसदी मरीज कृषि कार्यों में संलग्न मजदूरों के परिवारों से आते हैं । कुल 63 फीसदी दिमागी बुखार के मरीज ऐसे मिले हैं जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों से जुड़े हैं ।

डॉ. पांडेय ने बताया कि मरीजों के परिवार का शैक्षिक स्तर भी अच्छा नहीं पाया गया है। सीआईएफ के मुताबिक मरीजों में 31 फीसदी के पिता और 64 फीसदी की माताओं को प्राथमिक शिक्षा मिली हुई है । कुल 85 फीसदी मरीजों के घरों के 100 मीटर के दायरे में जानवर और 10 फीसदी मरीजों के आसपास सुअरबाड़े पाए गए। 50 फीसदी मरीज पक्के मकानों में, 32 फीसदी आधे कच्चे और 17 फीसदी मरीज कच्चे मकानों में पाए गए।

हाथ धोने में भी लापरवाही
सीएमओ का कहना है कि सीआईएफ के मुताबिक मरीजों के परिवारों में हैंडवॉश का साधन भी अच्छा नहीं पाया गया है । 53 फीसदी मरीजों के परिवार में हाथ धोने के लिए मिट्टी और 13 फीसदी मरीजों के परिवार में राख का इस्तेमाल किया जाता है ।

दिमागी बुखार के लक्षण
• अचानक तेज बुखार आना।
• झटके आना
• बेहोशी होना
• उल्टी होना

दिमागी बुखार रोकने के नौ मंत्र

• घर के आस-पास के वातावरण को चूहे, मच्छर और छछूंदर से मुक्त करें।
• इंडिया मार्का टू हैंडपंप का पानी पिएं।
• साबुन पानी से सुमन के फार्मूले पर हाथ धुलें।
• कुपोषित बच्चों को चिकित्सक को दिखाएं।
• सुअरबाड़े दूर हटवाएं।
• खुले में शौच न करें, रोजाना स्नान करें और शिक्षक विद्यार्थियों की साफ-सफाई का ध्यान रखें
• नियमित टीकाकरण सत्र में दो साल तक के बच्चों को जापानीज इंसेफेलाइटिस का टीका लगवाएं।
• आसपास जलजमाव न होने दें।
• लक्षण दिखते ही आशा कार्यकर्ता की मदद लेकर अस्पताल जाएं ।

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