• May 19, 2024
 शिक्षा को लेकर हमारी रणनीति को बदलने   की ज़रूरत-सिसोदिया

हार्वर्ड सोशल एंटरप्राइज कॉन्फ्रेंस में मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक-भावनात्मक लर्निंग पर बातचीत के दौरान, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि, शिक्षा के माध्यम से हमारे दैनिक जीवन में लचीलापन लाने की सख्त जरूरत है। महामारी के समय, घर पर रहना अपने आप में एक बड़ा आघात था। इस दौरान बच्चों की पढ़ाई का काफ़ी नुकसान भी हुआ, लोगों में भविष्य को लेकर एक अनिश्चितता बनी रही और कई लोगों की नौकरी भी छूट गई। ये सभी के लिए कठिन समय थे और हमारे सहनशीलता ने इस कठिन समय से निकलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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दिल्ली सरकार द्वारा मानसिक स्वास्थ्य और बेहतर जीवन शैली के लिए शुरू किए गए नवाचारों पर बातचीत करते हुए, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि, बच्चों में एक बेहतर जीवन शैली का विकास करने के लिए, हमने हैप्पीनेस पाठ्यक्रम को विकसित किया और छात्रों और शिक्षकों को माइंडफुलनेस का अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित किया। हमारे हैप्पीनेस करिकुलम का उद्देश्य बच्चों में आत्म-जागरूकता और माइंडफुलनेस, क्रिटिकल थिंकिंग और वैज्ञानिक कौशलों को विकसित करना, छात्रों को प्रभावी ढंग से संवाद करना सिखाना और उन्हें अपने आसपास के तनावपूर्ण और प्रतिकूल स्थितियों से निपटने के लिए जीवन कौशल सिखाने में मदद करना है। लगभग 3-4 लाख छात्रों ने माइंडफुलनेस और विभिन्न गतिविधियों का अभ्यास के द्वारा,अपने घरों में भावनात्मक रूप से मजबूत वातावरण बनाने में मदद की। हैप्पीनेस करिकुलम के माध्यम से, हम अपने आसपास के वातावरण और समाज को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
सिसोदिया ने कहा की , शिक्षा के मुख्यधारा में कुशलक्षेम को विषय के रूप जोड़ने की जरूरत है । हमें शिक्षा को लेकर हमारी रणनीति को बदलने और कुशलक्षेम को सीखने के डोमेन के रूप में मुख्यधारा के विषयों के रूप में अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि, बच्चों को लचीला बनाने और उन्हें हर परिस्थिति के अनुकूल विकसित दिल्ली सरकार द्वारा शुरू किए गए पहलों में से एक एंत्रप्रेन्योरशिप माइंडसेट करिकुलम है। बच्चें अपने भविष्य में जो कुछ करना चाहे लेकिन हम चाहते हैं कि हमारे छात्र एक उद्यमी की तरह ज़रूर सोचें और बड़े सपने देखने के लिए तैयार हों, नए और चुनौतीपूर्ण लक्ष्यों से पार पाने की कोशिश करें, बेहतर अवसरों को पहचानने में सक्षम हों, और मेहनत द्वारा उन अवसरों प्राप्त करें। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि, असफलताएं जीवन का एक हिस्सा हैं, लेकिन हमारे छात्रों को उनकी सफलता और असफलताओं दोनों से बाउंस करने, सफलता- असफलता का विश्लेषण कर उससे सीखने में सक्षम होना चाहिए, और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।

कोरोना के बाद के समय में सार्वजनिक शिक्षा में बदलाव किए जाने वाले या अपनाने वाले नए तरीकों पर बात करते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, कोरोना के बाद सार्वजनिक शिक्षा के लिए सबसे बड़ा टेकअवे तकनीकी और प्रौद्योगिकी है । हमें हमारे शिक्षा प्रणाली को जल्दी से प्रौद्योगिकी के अनुकूलित कर उसके उपयोग को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में प्रौद्योगिकी को विकसित करने के लिए सही दृष्टिकोण अपनाने से सीखने को अधिक समावेशी बनाया जा सकता है। इसके ध्यान में रखते हुए दिल्ली के पहले वर्चुअल स्कूल मॉडल की शुरुआत के साथ दिल्ली की शिक्षा प्रणाली में प्रौद्योगिकी को अपनाया जा रहा हैं। यह भारत में अपने तरह का अनूठा प्रयोग होगा। ये वर्चुअल स्कूल शहर के किसी भी अन्य नियमित सरकारी स्कूल के जैसा ही होगा। जहां छात्र, शिक्षक, नियमित शिक्षण-शिक्षण गतिविधियाँ, आकलन, और सबसे महत्वपूर्ण बात ये अपने छात्रों को एक समग्र शिक्षा प्रदान करेगा। उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा, छात्र जिस जगह से आते है हम उन समुदायों को सीखने के हब के रूप में विकसित करेंगे ये छात्रों में समाजीकरण की भावना विकसित करेगा। हमारा वर्चुअल स्कूल यह सुनिश्चित करेगा कि सभी के साथ समान व्यवहार किया जाए, ताकि देश के किसी भी हिस्से से कोई भी छात्र इस स्कूल तक पहुँच प्राप्त कर सके।

गवर्नेंस और लीडरशिप से परे लंबे समय तक चलने वाली लचीली प्रणालियों के निर्माण के विषय पर, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, लीडरशिप से अभिप्राय सभी स्टेकहोल्डर्स को साथ लेकर उनके सहयोग से कार्यो को करना है, दिल्ली की लीडरशिप केवल टॉप-डाउन लीडरशिप नही है बल्कि ,यह अधिक सहयोगी भी है। उन्होंने कहा कि, जब हम हैप्पीनेस करिकुलम विकसित कर रहे थे, तो यह सुनिश्चित किया गया कि इसमें हमारे शिक्षकों की बड़ी भूमिका हो, उनकी सभी सिफारिशें सुनी जाएं। समय के साथ, आप देख सकते हैं कि हमारे पास अब शिक्षकों का एक पूरा कैडर है, जो हैप्पीनेस करिकुलम की दृष्टि और परिणाम में विश्वास करते हैं। अंततः लचीलापन हमारी मानसिकता का एक हिस्सा है और हम अपने पाठ्यचर्यों के माध्यम से अपने मानसिकता का विकास कर रहे हैं।
कॉन्फ्रेंस में दिल्ली के नए बोर्ड पर चर्चा करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि, दिल्ली शिक्षा बोर्ड की शुरुआत लंबे समय से बच्चों के मूल्यांकन के लिए किए जा रहे ज्ञान का परीक्षण करने की बजाय बच्चों की मानसिकता के परीक्षण की ओर बढ़ेगा और यह सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा कि स्कूलों में छात्रों के सामाजिक, मानसिक और भावनात्मक विकास पर आधारित मूल्यांकन पर जोर देते हुए छात्रों की एक समग्र शिक्षार्थी प्रोफ़ाइल विकसित की जाए।

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