• February 21, 2024
 ‘मोदी रोजगार दो’  सोशल मीडिया पर क्यों कर रहा है ट्रेंड?
  • ट्विटर से लेकर यूट्यूब तक युवा रोजगार के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को घेर रहे हैं।
  • रविवार से ही हैशटैग ‘#modi_rojgar_do’ ट्विटर के साथ-साथ यूट्यूब पर ट्रेंड कर रहा है

विनीत राय।

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रोजगार का मुद्दा एक बार फिर सोशल मीडिया पर छाया हुआ है. ट्विटर से लेकर यूट्यूब तक युवा रोजगार के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को घेर रहे हैं। रविवार से ही हैशटैग ‘#modi_rojgar_do’ ट्विटर के साथ-साथ यूट्यूब पर ट्रेंड कर रहा है। ट्विटर पर तो ‘मोदी रोजगार दो’ की धमक ऐसी है कि दिन भर में 20 लाख से भी ज्यादा ट्वीट किए गए. इस कैंपेन से जुड़े लोगों में युवाओं और स्टू़डेंट्स की संख्या तो ज्यादा है ही, साथ ही ऐसे टीचर्स भी मैदान में हैं जो ऑनलाइन कोचिंग देते हैं. इन लोगों का कहना है कि इस हैशटैग की तो अभी शुरुआत भर है, असली धमाल 25 फरवरी को मचाना है। उस दिन सुबह 11 बजे से इस कैंपेन को ‘नेक्स्ट लेवल’ पर ले जाने का प्लान है।

पूरा मामला क्या है?

मंत्रालयों में दूसरी और तीसरी श्रेणी के विभिन्न पदों पर नियुक्तियों के लिए एक परीक्षा होती है. नाम है कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) एग्जामिनेशन. हर साल लाखों लोग इसमें भाग लेते हैं. इसे कराने का जिम्मा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन यानी SSC का होता है. दो साल पहले यानी 2019 में CGL के टीयर-2 की परीक्षा कराए जाने की घोषणा हुई थी. नवंबर 2020 में तीन चरणों में परीक्षा आयोजित की गई. 15, 16 और 18 नवंबर. परिणाम जारी हुए तीन दिन पहले 19 फरवरी को. उसके बाद से सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ कैंपेन चल रहा है।

परीक्षा परिणामों का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि 18 नवंबर का पेपर आसान था और छात्रों ने काफी अच्छा स्कोर किया था। कइयों ने कुल 200 अंक की परीक्षा में पूरे अंक तक हासिल किए थे. लेकिन जब रिजल्ट आया तो ऐसे कई छात्रों का सिलेक्शन नहीं हुआ, जिन्होंने अच्छा स्कोर किया था। इस पर स्टूडेंट्स का आरोप है कि 18 नवंबर को घोषित कट ऑफ से 100 मार्क्स तक काट दिए गए हैं. वहीं, 15 और 16 नवंबर को जिन लोगों ने एग्जाम दिया था, उनमें से कइयों के 70 से 80 नंबर तक बढ़ा दिए गए हैं. छात्रों को समझ नहीं आ रहा कि किस प्रक्रिया के तहत ऐसा किया गया. उनमें इस बात को लेकर काफी गुस्सा है।

हर साल एक करोड़ लोगों को रोजगार देने का किया था वादा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2013 में 16वीं लोकसभा चुनाव के दौरान उस वक्त की मौजूदा कांग्रेस की अगुवाई वाली मनमोहन सरकार को घेरते हुए कहा था, “कांग्रेस की सरकार ने वादा किया था कि सरकार बनेगी तो वो हर साल एक करोड़ नौजवानों को रोजगार देंगे। लेकिन, कितने लोगों को रोजगार दिया।“ पीएम मोदी का दूसरा कार्यकाल पीएम 2.0 चल रहा है। अब देश के युवाओं ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ हल्ला-बोल दिया है। युवा ट्वीटर और सोशल मीडिया के जरिए केंद्र और सरकारी संस्थानों से पूछ रहे हैं कि “बहाना नहीं बहाली चाहिए, मोदी रोजगार दो”। युवाओं का ये गुस्सा रविवार को दिनभर ट्वीटर पर तैरता रहा और ट्रेंड करता रहा।

उल्लेखनीय है कि कोरोना संकट के दौरान लाखों लोगों को अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ा था। सीएमआईई ने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि अप्रैल 2020 में 1.77 करोड़ वेतनभोगियों की नौकरी चली गयी थी। इसी तरह जून और जुलाई में भी लाखों लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ा था।

दरअसल, सरकारी नौकरी की ताक में बैठे युवाओं का आपा खोता जा रहा है। सिस्टम की लेटलतीफी और भ्रष्टाचार को लेकर बीते कई सालों से छात्र संघर्ष कर रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं। दो-तीन सालों की प्रतियोगिता परीक्षा का रिजल्ट और प्रक्रिया ठंड बस्ते में है।

बीते साल भी जब कोरोना महामारी की वजह से कई प्रतियोगी परिक्षाएं को स्थगित कर दिया था तो युवाओं ने “मैं भी बेरोजगार” अभियान चलाया था। दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी ने “मैं भी चौकीदार” अभियान चलाया था जिसको युवाओं ने बढ़ती बेरोजगारी दर के बीच आड़े हाथ लिया और केंद्र के खिलाफ मुहिम छेड़ दी।

अब युवाओं ने हैशटैग “मोदी रोजगार दो” कैंपेनिंग की शुरूआत कर रहे हैं। तैयारी कर रहे छात्रों का कहना है कि कर्मचारियों का चयन करने वाली संस्थान स्टाफ सेलेक्शन कमिशन (एसएससी) अब “स्लो सेलेक्शन कमिशन” बन गया है। परीक्षा में पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। 25 फरवरी से छात्र इस मुहिम की शुरूआत कर रहे हैं। प्रतियोगिता की पढ़ाई कर रहे छात्र और पढ़ा रहे शिक्षक भी केंद्र और चयन आयोग के खिलाफ हैं। इसमें ऑनलाइन कोचिंग और कई वेबसाइट के माध्यम से पढ़ा रहे शिक्षकों ने भी हल्ला बोल का ऐलान कर दिया है।

विश्व स्तर पर है रोजगार संकट 

कोरोना संकट के कारण भारत ही नहीं विश्व के कई देशों में रोजगार संकट देखने को मिल रहा है। अमेरिका में बेरोजगारी ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अमेरिका में नौकरी का बाजार पूरी तरह से ठप हो चुका है। दिसंबर में श्रमिकों की छटनी के बाद जनवरी में सिर्फ 49,000 नौकरियों के लिए विज्ञापन निकले हैं।

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