• May 25, 2024
 किसान सम्मेलन में दूध-जलेबी पर हुई बजट को लेकर बेबाक चर्चा

केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार किसानों को दोगुनी आय पहुंचाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, लेकिन कुछ लोग अपनी राजनीतिक स्वार्थ सिद्धी के लिए किसान आंदोलन के बहाने देश की कानून व्यवस्था को शर्मसार करने में लगे हुए हैं। प्रदेश कार्यालय में दूध-जलेबी पर आयोजित किसान सम्मेलन में बजट पर चर्चा के दौरान किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद राजकुमार चाहर ने ये बातें कही। कार्यक्रम में राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद सुधांशु त्रिवेदी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता, प्रदेश महामंत्री कुलजीत सिंह चहल, मीडिया प्रमुख नवीन कुमार, पूर्व विधायक नील दमन खत्री, पूर्व विधायक सत्यप्रकाश राणा, प्रदेश प्रवक्ता अजय सहरावत सहित प्रदेश, जिला और मंडल के पदाधिकारी भी मौजूद थे। कार्यक्रम का आयोजन प्रदेश किसान मोर्चा के अध्यक्ष विनोद सहरावत ने किया। कार्यक्रम का संचालन प्रदेश प्रवक्ता विक्रम बिधूड़ी ने किया।

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किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद राजकुमार चाहर ने कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी देश के गांव में रहने वाले गरीब किसानों की दशा क्या है, इसके बारे में किसी ने कभी नहीं सोचा। आज किसान आंदोलन के नाम पर किसानों को केंद्र सरकार के खिलाफ भ्रम फैला कर कुछ लोग अपनी राजनीति चमकाना चाह रहे हैं। इनको आपकी जमीनों की चिंता नहीं है। इसके पीछे इनका स्वार्थ है। इनकी चाहत तो सिर्फ इतनी है कि किसी गांव का किसान का बेटा विधानसभा में न जाए। उन्होंने कहा कि किसान चाहते थे कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू हो, उसको प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी   द्वारा 90 फीसदी लागू कर दिया गया। किसान के लिए किसान फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, कुसुम योजना और अनेक प्रकार की योजना केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही हैं।

 

राजकुमार चाहर ने कहा कि इनको किसानों की नहीं खुद की चिंता सता रही है कि एक तो पहले ही पूरा देश मोदी   के साथ है, अगर किसान की आय दोगुनी हो गई तो हमें बोरिया-बिस्तर बांधकर इटली भागना पड़ेगा। इसलिए वे किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर चला रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  ने किसानों के खाते में 6000 रुपये डालकर उसी दिन घोषणा कर दी थी कि मैं किसानों का हितैषी हूं और किसानों के लिए कुछ करना चाहता हूं।

 

सुधांशु त्रिवेदी ने किसानों को सावधान करते हुए कहा कि किसान आंदोलन के नाम पर भ्रम फैलाने वालों से बचें। ये वही आंदोलनजीवी हैं जो कभी छात्रों के आंदोलन में तो कभी सीएए के आंदोलन में दिखाई देते हैं। अब ये किसान आंदोलन के जरिए देश की सरकार पर निशाना लगाकर सिर्फ अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि तलाश कर रहे हैं। तीनों किसान बिल सिर्फ किसानों के फायदें के लिए हैं। नरेन्द्र मोदी   ने स्वयं दोनों सदनों में कहा है कि ना मंडी खत्म होगी, ना एमएसपी खत्म होगी, हम सिर्फ किसानों के फायदें के लिए नई बाजार और उनकी फसल को बेंचने के और भी माध्यम उपलब्ध करा रहे हैं। इन तीनों बिलों की वजह से कृषि क्षेत्र में नया निवेश आएगा, नई और आधुनिक तकनीकियां आएंगी और रोजगार के नए साधन खुलेंगे। मोदी सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए और कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

 

 

 

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